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लंपी वायरस से गौमाता को बचाने के लिए आयुर्वेदिक दवाई बनाने की विधि।

आदित्यवाहिनी गौ रक्षा अभियान

औषधियुक्त रोटी या बाटी

यदि कोई छोटे स्तर पर कार्य आरम्भ करना चाहे तो वे कुछ सदस्य मिलकर रोटी या बाटी बना सकते हैं। आटे

निम्नलिखित घटक मिलायें –

1 डोज़ अनुसार सामग्री 20 ग्राम गिलोय 20 ग्राम नीम चूर्ण 3 ग्राम फिटकरी फूला

5 ग्राम हल्दी

20 ग्राम गुड़

2 किलो गिलोय

100 डोज़ अनुसार सामग्री 2 किलो नीम चूर्ण 500 ग्राम हल्दी 300 ग्राम फिटकरी फूला

2 किलो गुड़

– यदि आप छोटे स्तर पर कार्य कर रहे हैं और – फिटकरी फूला नहीं बना सकते तो फिटकरी न डालें । इसके बिना ही अन्य घटकों का मिश्रण कर कार्य करें ।

– एक रोटी में 45-48 ग्राम औषधि चूर्ण मिलाना बहुत कठिन है | अतः 15 ग्राम की तीन रोटी/ 24 ग्राम की दो रोटी ; इस प्रकार एक डोज़ को कई हिस्सों में बाँट लें। यदि उपरोक्त रोटी/बाटी में कम सामग्री डाल रहे हैं, तो 2-3 रोटी के बराबर एक समय की डोज़ मान्य होगी।

– बाजरी के आटे या जौ के आटे की बाटी बनाने में प्राथमिकता दें। आवश्यक नहीं है कि बाटी गोल ही हो, फैली हुई भी उपयोगी है। गेहूँ के आटे की रोटी को अन्तिम विकल्प के रूप में रखें । गेहूँ का आटा गौवों हेतु अधिक लाभकारी नहीं है | परन्तु अन्य विकल्प न होने पर गेहूँ के आटे का प्रयोग कर सकते हैं ।

– यदि सम्भव हो तो रोटी या बाटी बनाने के लिए आटे में डालने वाले सामान्य पानी के स्थान पर गुड़ युक्त पानी का प्रयोग करें ।

– स्वस्थ गाय को दिन में एक डोज़ और बीमार गाय को दिन में तीन डोज़ (प्रात:- मध्याह्न – सायं) दें बीमार गौ को परिस्थिति अनुसार इसके अतिरिक्त संजीवनी वटी और महासुदर्शन चूर्ण भी दें | स्वस्थ गाय को 1-2 सप्ताह तक निरन्तर देने से रोगप्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी, जिससे वह बड़े स्तर पर बीमार होने से बच जायेगी ।

– लाभ

यह प्रयोग अत्यन्त सफल रहा। सामान्यतः कड़वी औषधि के कारण कुछ गायें लड्डू नहीं खाती। लेकिन रोटी में डालकर बनाने से अधिकांश गाय ने इस औषधियुक्त रोटी को खा लिया | अतः व्यावहारिक रूप से इस कार्य में

सरलता है।

• गुड़ की चाशनी बनाने की आवश्यकता नहीं है ।

रोटी के अन्दर सीधा गुड़ का खण्ड डाल सकते हैं

| गुड़ डालने से गाय सरलता से रोटी खा लेती है। अधिक बड़े स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता नहीं है। छोटे कार्य से ही आरंभ किया जा सकता है। मोहल्लेवासियों से भी सहायता ली जा सकती है। अधिक व्यय की भी आवश्यकता नहीं ।

• जीवनकाल अधिक | लड्डू की अपेक्षा अधिक समय तक रोटी/बाटी खराब नहीं होगी ।

– जनसहयोग- यदि किसी क्षेत्र के लोग गोरक्षा हेतु जागरुक और कर्मठ हैं तो उस क्षेत्र में औषधियुक्त चूर्ण वितरण करें और क्षेत्रवासियों को निवेदन करें कि वे नित्य प्रति परिवार 4-5 रोटी बनाकर एक स्थान पर एकत्रित करें। तत्पश्चात् एकत्रित रोटियों को क्षेत्रवासी गौभक्त गाय को खिलाने का कार्य करे। यदि सभी लोग स्वयं रोटी खिलायेंगे तो ऐसा सम्भव है कि एक ही गाय को अधिक डोज़ दे दी जाये, तो ओवरडोज़ के कारण नपरसानदेह होगा | इसलिए एक स्थान पर एकत्रित करने के पश्चात् गाय को औषधियुक्त रोटी देना आवश्यक है।

डॉ. हेमन्त पालीवाल जी के निर्देशन अनुसार यह लेख लिखा गया है

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